बजरंग बाण (श्लोक 26)
बजरंग बाण श्लोक 26 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
श्लोक:
"जनकसुता हरि दास कहावो । ताकी सपथ विलंब न लावो।।"
शब्दार्थ:
जनकसुता – जनक की पुत्री, अर्थात् सीता माता
हरि दास – भगवान श्रीराम के सेवक
कहावो – कहलाते हो, प्रसिद्ध हो
ताकी सपथ – उसकी शपथ, अर्थात सीता माता की शपथ
विलंब न लावो – देर न करो
भावार्थ:
हे हनुमानजी! आप जनकनंदिनी सीता माता के परमप्रिय और भगवान श्रीराम के सेवक कहलाते हो। मैं आपको सीताजी की शपथ देकर प्रार्थना करता हूँ कि मेरी सहायता में तनिक भी देर न करें।
विस्तृत विवेचन:
1. सीता माता की शपथ का महत्व:
इस श्लोक में वाचक (साधक) हनुमानजी से प्रार्थना करता है कि वह शीघ्र उसकी सहायता करें। इसके लिए वह सीता माता की शपथ देकर भावनात्मक आग्रह करता है। यह दर्शाता है कि सीताजी का नाम और उनकी शपथ अत्यंत पवित्र एवं प्रभावशाली मानी जाती है, जिससे हनुमानजी तुरंत प्रसन्न होते हैं।
2. हनुमानजी की भक्ति और सेवा भावना:
यह पंक्ति हनुमानजी की राम-सीता भक्ति की महिमा बताती है। वे अपने आराध्य श्रीराम और माता सीता के लिए सर्वस्व अर्पण कर देने वाले हैं। जब कोई भक्त सीता माता की शपथ लेकर उन्हें पुकारता है, तो वे उसकी सहायता के लिए तुरंत दौड़ पड़ते हैं। यहाँ "विलंब न लावो" कहकर उनकी तत्परता को जागृत करने की कोशिश की गई है।
निष्कर्ष:
यह श्लोक भक्त और भगवान के बीच की भावना, विश्वास और तात्कालिक कृपा की भावना को दर्शाता है। इसमें भक्ति, आह्वान और संकट निवारण की प्रबल भावना छिपी हुई है।
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