बजरंग बाण(श्लोक25)
बजरंग बाण श्लोक 25 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन: श्लोक: "इन्हें मारु तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की शब्दार्थ: इन्हें मारु – इन दुष्टों/शत्रुओं का नाश करो। तोहि सपथ राम की – तुम्हें श्रीराम की शपथ है। राखु नाथ – हे प्रभु! रक्षा कीजिए। मरजाद नाम की – श्रीराम के नाम और मर्यादा की रक्षा करो। भावार्थ: हे हनुमानजी! मैं आपको श्रीराम की सौगंध देकर कहता हूँ—इन दुष्टों को नष्ट कर दीजिए और श्रीराम के नाम की मर्यादा की रक्षा कीजिए। विस्तृत विवेचन: यह श्लोक हनुमानजी की शरण में जाने वाले भक्त के दृढ़ विश्वास और आर्त भाव को दर्शाता है— 1. राम की सौगंध देकर प्रार्थना: जब कोई भक्त हनुमानजी को "राम की सौगंध" देता है, तो वह संकेत करता है कि अब यह केवल भक्त की नहीं, श्रीराम के प्रति हनुमान जी की वचनबद्धता की बात है। यह एक अत्यंत मार्मिक और गंभीर निवेदन है। 2. नाम और मर्यादा की रक्षा: हनुमानजी केवल शक्ति के प्रतीक नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और राम नाम की प्रतिष्ठा के रक्षक भी हैं। भक्त चाहता है कि संकट में श्रीराम के आदर्श, उनके भक्तों की गरिमा और रामभक्ति की मर्यादा सुरक्षित रहे। ...