हनुमान चालीसा (38श्लोक)
हनुमान चालीसा के 38 वें श्लोक का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:- श्लोक: "जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरु देव की नाईं।।" भावार्थ: हे हनुमानजी! आपकी जय हो, बारंबार आपकी वंदना करता हूँ। कृपया मुझ पर उसी प्रकार कृपा करें जैसे एक गुरु अपने शिष्य पर करता है। विस्तृत विवेचन: 1. "जय जय जय हनुमान गोसाईं" का अर्थ: "जय जय जय" का अर्थ है बार-बार विजय और सम्मान का उद्घोष। यह भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। "हनुमान गोसाईं" का अर्थ है पूज्य हनुमानजी, जो संन्यासी और गुरु-स्वरूप भी हैं। इस पंक्ति में भक्त हनुमानजी की महिमा का गुणगान करता है और उनकी विजय का आह्वान करता है। 2. "कृपा करहु गुरु देव की नाईं" का तात्पर्य: भक्त हनुमानजी से प्रार्थना करता है कि वे उसी प्रकार कृपा करें जैसे एक सच्चा गुरु अपने शिष्य पर करता है। गुरु अपने शिष्य को सही मार्ग दिखाता है, उसे अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाता है और उसकी रक्षा करता है। हनुमानजी को भी एक आदर्श गुरु के रूप में देखा जाता है, क्योंकि वे शक्ति, भक्ति, ज्ञान और विनम्रता का संगम हैं। इस पंक्ति में भक्त, हनुमा...