हनुमान चालीसा (32श्लोक)

 हनुमान चालीसा के 32 वें श्लोक का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:-

श्लोक:

"साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।"

भावार्थ:

हनुमानजी साधु-संतों और धर्मपरायण लोगों की रक्षा करते हैं। वे दुष्टों और असुरों का संहार करने वाले हैं और भगवान श्रीराम के प्रिय भक्त हैं।

विस्तृत विवेचन:

1. "साधु-संत के तुम रखवारे" का अर्थ:

हनुमानजी धर्म, सत्य और भक्ति के मार्ग पर चलने वालों की रक्षा करते हैं।

वे भक्तों को संकटों से बचाते हैं और उन्हें शक्ति व साहस प्रदान करते हैं।

अनेक कथाओं में हनुमानजी भक्तों को विपत्तियों से उबारते हुए दिखते हैं, जैसे तुलसीदासजी को कष्टों से बचाना।

2. "असुर निकंदन" का तात्पर्य:

"निकंदन" का अर्थ है नाश करने वाला। हनुमानजी दुष्टों और अधर्मियों का विनाश करते हैं।

त्रेतायुग में उन्होंने लंका दहन किया, अनेक राक्षसों को मारा और राम-कार्य में बाधा डालने वाले असुरों का नाश किया।

आज भी उनकी भक्ति नकारात्मक शक्तियों और बुरी प्रवृत्तियों को समाप्त करने में सहायक मानी जाती है।

3. "राम दुलारे" का अर्थ:

हनुमानजी भगवान श्रीराम के अत्यंत प्रिय हैं। वे न केवल उनके परम भक्त हैं, बल्कि श्रीराम भी उन्हें अपने पुत्र-समान स्नेह करते हैं।

श्रीराम ने हनुमानजी को अमरत्व का आशीर्वाद दिया और कहा कि जब तक यह संसार रहेगा, हनुमानजी का यश बना रहेगा।

निष्कर्ष:

हनुमानजी भक्तों के संरक्षक और अधर्म के विनाशक हैं। उनकी भक्ति से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और हर संकट का समाधान मिलता है। वे श्रीराम के प्रिय होने के कारण, रामभक्तों के लिए भी सहज ही कृपालु हैं।

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