हनुमान चालीसा (37श्लोक)

 हनुमान चालीसा के 37 वें श्लोक का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:-

श्लोक:

"संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।"

भावार्थ:

जो भी श्रद्धा और भक्ति के साथ वीर हनुमानजी का स्मरण करता है, उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं और उसके जीवन की सारी पीड़ा समाप्त हो जाती है।

विस्तृत विवेचन:

1. "संकट कटै मिटै सब पीरा" का अर्थ:

हनुमानजी को "संकट मोचन" कहा जाता है, अर्थात वे अपने भक्तों के सभी संकटों को हर लेते हैं।

"पीरा" का अर्थ है दुख और कष्ट। यह मानसिक, शारीरिक, भौतिक या आध्यात्मिक किसी भी प्रकार का हो सकता है।

जब कोई व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से हनुमानजी की अराधना करता है, तो वह धीरे-धीरे अपने जीवन के सभी कष्टों से मुक्त हो जाता है।

2. "जो सुमिरै हनुमत बलबीरा" का तात्पर्य:

"सुमिरै" का अर्थ है स्मरण करना या भजन करना।

हनुमानजी को "बलबीरा" कहा गया है, जिसका अर्थ है वे असीम शक्ति और वीरता के प्रतीक हैं।

जो व्यक्ति हनुमानजी की भक्ति करता है और उन्हें अपने जीवन में श्रद्धा से याद करता है, उसे अपार शक्ति प्राप्त होती है और उसके सभी भय समाप्त हो जाते हैं।

प्रासंगिकता:

यह श्लोक हमें बताता है कि हनुमानजी का स्मरण करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएँ समाप्त हो सकती हैं।

जो व्यक्ति नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करता है, वह मानसिक तनाव, रोग, भय, शत्रु और अन्य कष्टों से मुक्त हो सकता है।

हनुमानजी की कृपा से आत्मविश्वास, साहस और आध्यात्मिक बल बढ़ता है, जिससे व्यक्ति जीवन की कठिनाइयों का सामना करने में सक्षम हो जाता है।

निष्कर्ष:

हनुमानजी के स्मरण से जीवन के सभी संकट और दुख समाप्त हो जाते हैं। उनकी भक्ति से व्यक्ति को असीम शक्ति और आत्मबल प्राप्त होता है, जिससे वह अपने जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को पार कर सकता है।

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