बजरंग बाण (श्लोक 13)

 बजरंग बाण श्लोक 13 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

श्लोक:

"ऊं हनु हनु हनु हनुमंत हठीले।

बैरिहु मारु बज्र के कीले।।"

शब्दार्थ:

ऊं = पवित्र प्रणव मंत्र, ईश्वरीय शक्ति का प्रतीक

हनु हनु हनु = मारो, नाश करो (तीन बार — बल, बुद्धि और बाधा तीनों पर प्रहार का संकेत)

हनुमंत हठीले = हे दृढ़ संकल्प वाले, अडिग हनुमान जी

बैरिहु = शत्रुओं को

मारु = मारिए, पराजित कीजिए

बज्र के कीले = वज्र (इंद्र का अस्त्र) जैसे तीखे और अडोल प्रहार से

भावार्थ:

हे हनुमान जी! आप दृढ़ निश्चयी और हठी हैं (संकल्प में अडिग)।

आपसे प्रार्थना है कि आप मेरे शत्रुओं का नाश करें —

ऐसे जैसे वज्र से कील ठोंक दी जाती है — अचल और अटल प्रहार के साथ।

विस्तृत विवेचन:

1. तीव्र प्रहार और शक्ति का आह्वान:

इस श्लोक में भक्त हनुमान जी की उग्र और रक्षक रूप में स्तुति करता है।

"हनु हनु हनु" — यह तीन बार दोहराना दर्शाता है कि संकट या शत्रु चाहे जिस रूप में हो —

मानसिक, आध्यात्मिक या भौतिक — हनुमान जी उसे नष्ट करने में समर्थ हैं।

2. ‘हठीले’ हनुमान:

"हठीले" शब्द बहुत विशेष है — यह दर्शाता है कि हनुमान जी जब कोई संकल्प ले लें, तो उसे पूर्ण किए बिना रुकते नहीं।

जैसे उन्होंने सीता माता की खोज का संकल्प लिया, वैसे ही वे भक्त के दुखों के शत्रुओं को भी समाप्त करने का संकल्प ले सकते हैं।

3. ‘बज्र के कीले’ रूपी वार:

यह प्रतीक बताता है कि हनुमान जी का प्रहार इतना तीव्र और स्थायी होता है, जैसे वज्र से कील ठोक दी गई हो —

यानी वह शत्रु फिर कभी उठ नहीं सकता।

यह श्लोक सिर्फ बाह्य शत्रुओं की बात नहीं करता, अंतर्मन के शत्रु — जैसे भय, संशय, क्रोध — उनके नाश की भी प्रार्थना करता है।

4. शक्ति का बीज मंत्र:

"ऊं हनु हनु हनु" — यह अपने आप में मंत्र-जाप है।

जो व्यक्ति संकट के समय इस मंत्र को श्रद्धा

 और विश्वास से जपे, उसके जीवन से अंधकार हट सकता है।

  निष्कर्ष:

"ऊं हनु हनु हनु हनुमंत हठीले..."

यह श्लोक हनुमान जी की आक्रामक, रक्षक और उग्र शक्ति का आह्वान करता है।

जब भक्त संकटों से घिरा हो, और शत्रु (भीतर या बाहर) उस पर हावी हो रहे हों —

तब यह मंत्र रक्षक कवच की तरह कार्य करता है।

हनुमान जी, जो अडिग हैं, जो असुरों का नाशक हैं —

वही भक्त के लिए वज्र समान सुरक्षा बनते हैं।

जय हनुमान, संकट-मोचक, हठी वीर!

Comments

Popular posts from this blog

बजरंग बाण (श्लोक 36)

बजरंग बाण (श्लोक 26)

हनुमान चालीसा (41श्लोक)