बजरंग बाण (श्लोक 14)

 बजरंग बाण श्लोक 14 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

श्लोक:

"गदा बज्र लै बैरिहि मारो।

महाराज प्रभु दास उबारो।।"

शब्दार्थ:

गदा = हनुमान जी का प्रिय शस्त्र

बज्र = इंद्र का अमोघ अस्त्र, अजेय शक्ति का प्रतीक

लै = लेकर

बैरिहि मारो = शत्रुओं को मारो

महाराज = प्रभु, स्वामी

दास = सेवक (भक्त)

उबारो = बचाइए, रक्षा कीजिए

भावार्थ:

हे महाराज हनुमान जी! कृपया अपनी गदा और वज्र लेकर मेरे शत्रुओं का नाश कीजिए।

मैं आपका दास हूँ, आपकी शरण में हूँ — आप ही मेरी रक्षा कीजिए।

विस्तृत विवेचन:

1. गदा और वज्र — दो अद्वितीय प्रतीक:

गदा हनुमान जी की वीरता, बल और रक्षण का प्रतीक है।

बज्र अजेय शक्ति, अमोघ संकल्प और अनंत ऊर्जा का प्रतीक है।

जब भक्त इन दोनों का आह्वान करता है, तो वह कहता है — “हे प्रभु! अब कोई उपाय नहीं, केवल आप ही मेरी ढाल हैं।”

2. बाहरी और आंतरिक शत्रुओं का नाश:

"बैरिहि मारो" — यह केवल शारीरिक शत्रुओं के लिए नहीं,

बल्कि अहंकार, भय, मोह, क्रोध, आलस्य जैसे आंतरिक शत्रुओं के लिए भी है।

हनुमान जी से निवेदन है कि वे अपने अस्त्रों से उन सभी बाधाओं को समाप्त करें।

3. भक्त की पुकार:

"प्रभु दास उबारो" — यह पूर्ण समर्पण की वाणी है।

भक्त स्वीकार करता है कि वह निर्बल है, परंतु प्रभु सर्वशक्तिमान हैं।

यह पंक्ति हमें सिखाती है कि शरणागति में ही शक्ति है।

4. हनुमान जी का रक्षक रूप:

यह श्लोक हनुमान जी के संकटमोचन रूप को प्रकट करता है।

जब जीवन में कोई आश्रय न बचे, तब के

वल एक पुकार —

"दास उबारो!" — और हनुमान जी तुरंत दौड़ते हैं।

निष्कर्ष:

"गदा बज्र लै बैरिहि मारो..."

यह श्लोक भक्त की पूर्ण शरणागति और विश्वास को दर्शाता है।

जब जीवन के संग्राम में हम थक जाएँ, और हर ओर से संकट घेर ले —

तब बस एक नाम, एक पुकार काफी है —

हनुमान जी गदा-वज्र लेकर हमारी रक्षा करने अवश्य आते हैं।

जय हनुमान! संकट हर, दास रक्षक, अजेय वीर!

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