बजरंग बाण (श्लोक 15)

 बजरंग बाण श्लोक 15 भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

श्लोक:

"ऊं कार हुंकार महाप्रभु धावो।

बज्र गदा हनु बिलंब न लावो।।"

शब्दार्थ:

ऊं कार = "ऊं" ध्वनि, जो सृष्टि की आदिशक्ति का प्रतीक है

हुंकार = हनुमान जी की गर्जना, जो भय नाश करती है

महाप्रभु = महान प्रभु, अर्थात् हनुमान जी

धावो = दौड़ आइए

बज्र गदा = वज्र और गदा, दोनों अस्त्र

हनु = मारिए, प्रहार कीजिए

बिलंब न लावो = देर न कीजिए

भावार्थ:

हे आदिशक्ति स्वरूप, हुंकार से संकट नाश करने वाले महाप्रभु हनुमान जी!

आप तुरंत दौड़ आइए, और अपनी वज्र तथा गदा से शत्रुओं पर प्रहार कीजिए —

कृपया कोई विलंब न करें।

विस्तृत विवेचन:

1. भक्त की तीव्र पुकार:

यह श्लोक अत्यंत संकट और पीड़ा के क्षणों में बोला जाता है।

जब भक्त चारों ओर से घिरा हो, तब वह हनुमान जी को तुरंत बुलाता है, और कहता है —

“हे प्रभु, अब देरी मत कीजिए।”

2. ऊंकार और हुंकार का शक्तिशाली संगम:

“ऊंकार” ब्रह्मांड की आध्यात्मिक ऊर्जा है।

“हुंकार” हनुमान जी की पराक्रमी पुकार है — जो भय, राक्षस और नकारात्मक शक्तियों को नष्ट कर देती है।

यह बताता है कि हनुमान जी दैवी और रक्षक दोनों रूपों में आते हैं।

3. ‘धावो’ — हनुमान जी की तत्परता:

तुलसीदास जी ने हनुमान जी को सदा दौड़कर आने वाला देव कहा है।

वे भक्त की पुकार पर तुरंत प्रकट होते हैं — चाहे स्थिति कितनी भी विषम क्यों न हो।

4. बज्र-गदा से नाश:

यह प्रतीक बताता है कि हनुमान जी कोई सामान्य उपाय नहीं लाते —

वे वज्र जैसी शक्ति और गदा जैसे पराक्रम

 के साथ आते हैं,

जो शत्रु और संकट को जड़ से नष्ट कर देता है।

निष्कर्ष:

"ऊं कार हुंकार महाप्रभु धावो..."

यह श्लोक उस घड़ी का मंत्र है जब भक्त की आशा केवल हनुमान जी की कृपा पर टिकी होती है।

यह केवल आह्वान नहीं — बल्कि विश्वास से भरी पुकार है, कि

“हे प्रभु! अब समय नहीं है सोचने का — बस आइए और रक्षा कीजिए।”

जय हनुमान! ऊंकार स्वरूप, संकट हरणकर्ता, तत्काल कृपा करने वाले!

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