बजरंग बाण (श्लोक 21)

 बजरंग बाण श्लोक 21 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

श्लोक:

"पाय परों करि जोर मनावौ। यहि अवसर अब केही गोहरावौं।।"

शब्दार्थ:

पाय परौं करि जोर – आपके चरणों में हाथ जोड़कर पड़ता हूँ।

मनावौ – प्रार्थना करता हूँ, निवेदन करता हूँ।

यहि अवसर – इस समय, इस अवसर पर।

अब केही गोहरावौं – अब किसको पुकारूँ?

भावार्थ:

मैं आपके चरणों में हाथ जोड़कर निवेदन करता हूँ। इस संकट की घड़ी में मैं असहाय हूँ, अब मुझे आप ही का सहारा है। मैं और किसे पुकारूँ?

विस्तृत विवेचन:

यह श्लोक भक्त और भगवान के बीच पूर्ण समर्पण की भावना को दर्शाता है। यहाँ भक्त भगवान हनुमान से कहता है कि—

1. पूर्ण समर्पण – "पाय परौं करि जोर" से स्पष्ट है कि भक्त अब स्वयं को पूरी तरह प्रभु के चरणों में समर्पित कर चुका है। यह दीनता और श्रद्धा का प्रतीक है।

2. असहाय स्थिति – "यहि अवसर अब केही गोहरावौं" में भक्त कह रहा है कि इस कठिन समय में उसके पास कोई और विकल्प नहीं है। अब वो केवल हनुमान जी को ही पुकार सकता है।

यह भाव दर्शाता है कि जब संसार के सारे साधन विफल हो जाएँ, तब केवल प्रभु का शरणागति मार्ग ही शेष रहता है।

निष्कर्ष:

यह श्लोक हमें सिखाता है कि संकट की घड़ी में ईश्वर का स्मरण और शरणागति ही सच्चा उपाय है। हनुमान जी जैसे महाबली देवता की कृपा से हर संकट टल सकता है।


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