बजरंग बाण (श्लोक 22)
बजरंग बाण श्लोक 22 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:
श्लोक:
"जय अंजनि कुमार बलवंता। शंकर सुमन वीर हनुमंता।।"
शब्दार्थ:
जय – विजय हो, नमन हो।
अंजनि कुमार – माता अंजना के पुत्र।
बलवंता – अत्यधिक बलशाली।
शंकर सुमन – भगवान शिव के अंश से उत्पन्न।
वीर हनुमंता – पराक्रमी और महान योद्धा हनुमान।
भावार्थ:
हे अंजना माता के पुत्र, अतुल बलशाली, भगवान शिव के अंशज, वीर हनुमान जी! आपको नमन है, आपकी जय हो।
विस्तृत विवेचन:
यह श्लोक हनुमान जी के स्वरूप और महिमा का गुणगान करता है। इसमें भक्त उनके गुणों का स्मरण कर उनके चरणों में नमन कर रहा है—
1. परम शक्ति और बल के प्रतीक:
"बलवंता" शब्द बताता है कि हनुमान जी असाधारण शक्ति के स्वामी हैं। उनका बल दैवीय है, जिससे वे बड़े-बड़े कार्य सहजता से कर सकते हैं।
2. दिव्य उत्पत्ति और वीरता:
"शंकर सुमन" का अर्थ है – हनुमान जी भगवान शंकर के अंश से उत्पन्न हुए हैं, अतः वे केवल शारीरिक बल में ही नहीं, अपितु आत्मिक बल और दिव्य शक्तियों में भी पूर्ण हैं। "वीर हनुमंता" उनकी अद्भुत पराक्रमशक्ति का स्मरण कराता है, जैसे उन्होंने रावण जैसे दैत्य को भी पराजित किया।
निष्कर्ष:
यह श्लोक हमें सिखाता है कि सच्चे साहस, शक्ति और भक्ति का मेल अगर किसी में है, तो वह हनुमान जी में है। उनकी आराधना से भक्त को भी साहस, बल और भय से मुक्ति मिलती है।
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