बजरंग बाण (श्लोक 24)

 बजरंग बाण श्लोक 24 भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

श्लोक:

"भूत प्रेत पिसाच निशाचर। अग्नि बेताल काल मारी मर।।"

शब्दार्थ:

भूत, प्रेत, पिसाच – भयानक भूत-प्रेत और दुष्ट आत्माएँ।

निशाचर – रात में विचरण करने वाले दुष्ट जीव (जैसे राक्षस)।

अग्नि – अग्नि के समान तेजस्वी दुष्ट शक्तियाँ।

बेताल – पिशाचों की एक भयंकर जाति।

काल – मृत्यु के देवता समान भयावह शक्तियाँ।

मारी मर – इन सभी का वध कर देना, विनाश कर देना।

भावार्थ:

हे हनुमानजी! आप भूत, प्रेत, पिशाच, राक्षस, अग्नि के समान प्रचंड शक्तियों, बेतालों और मृत्यु के समान भयावह शक्तियों का संहार करने वाले हैं।

विस्तृत विवेचन:

यह श्लोक हनुमानजी की अद्भुत अपराजेय शक्ति और भूत-प्रेत बाधाओं से मुक्ति देने वाली कृपा को दर्शाता है—

1. सभी दुष्ट शक्तियों का नाशक:

हनुमानजी भूत-प्रेत, पिशाच, निशाचर (राक्षस), बेताल, अग्नि जैसे भयावह और काल जैसे प्रचंड शक्तियों को भी मार गिराने में समर्थ हैं। जहाँ उनका नाम लिया जाता है, वहाँ कोई भी नकारात्मक शक्ति टिक नहीं सकती।

2. भय और संकट से मुक्त करने वाले:

भक्तों के जीवन में आने वाली अदृश्य बाधाएँ (जैसे मानसिक भय, अशुभ शक्तियाँ) को भी हनुमानजी अपने तेज से भस्म कर देते हैं। इसलिए उन्हें "संकटमोचन" भी कहा जाता है।

निष्कर्ष:

यह श्लोक हमें सिखाता है कि जीवन के अदृश्य भय, मानसिक क्लेश या बुरी शक्तियों से केवल प्रभु (हनुमानजी) की शरण में जाकर ही पूर्ण रक्षा हो सकती है। उनका स्मरण ही सबसे बड़ा कवच है।

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