हनुमान चालीसा (43श्लोक)

 हनुमान चालीसा के 43 वें श्लोक का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:-

श्लोक:

"लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।

बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।।"

भावार्थ:

हे हनुमान जी! आपकी देह लालवर्ण की है जो तेज से चमक रही है। आपने लाल रंग का लंगोट धारण किया है। आपकी देह वज्र समान कठोर है और आप दानवों का नाश करने वाले महान वानर वीर हैं। आपकी जय हो, आपकी बारंबार विजय हो।

विस्तृत विवेचन:

1. हनुमान जी का रूप और तेज

"लाल देह लाली लसे" – हनुमान जी का शरीर लालवर्ण का है, जो उनके तेज, ऊर्जा और बल का प्रतीक है। यह वर्ण भक्ति, वीरता और तपस्या का भी प्रतीक माना जाता है।

"अरु धरि लाल लंगूर" – उन्होंने लाल रंग का लंगोट पहन रखा है, जिससे उनका संन्यासी और ब्रह्मचारी रूप प्रकट होता है।

2. बल और पराक्रम का वर्णन

"बज्र देह" – हनुमान जी का शरीर वज्र (इंद्र का अस्त्र) के समान कठोर और अजेय है, जिससे वे अजेय और अटूट शक्ति के स्वामी प्रतीत होते हैं।

"दानव दलन" – हनुमान जी राक्षसों का नाश करने वाले हैं। उन्होंने लंका दहन किया, असुरों को मारा, और श्रीराम की विजय में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

"कपि सूर" – ‘कपि’ अर्थात् वानर और ‘सूर’ अर्थात् वीर। वे वानरों में सर्वश्रेष्ठ वीर हैं।

3. जय-जयकार

इस श्लोक के अंत में तीन बार "जय" का उच्चारण कर हनुमान जी की महिमा का गुणगान किया गया है। यह भक्त का उनके प्रति अगाध प्रेम और श्रद्धा को दर्शाता है।

निष्कर्ष:

यह श्लोक हनुमान जी की बाहरी आभा, उनके शौर्य, पराक्रम और भक्तों पर कृपा के भाव को प्रकट करता है। वे न केवल भक्ति के आदर्श हैं बल्कि शक्ति, निडरता और धर्मरक्षा के प्रतीक भी हैं।

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