बजरंग बाण (श्लोक 7)
बजरंग बाण श्लोक 7 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:-
श्लोक:
"बाग उजारि सिंधु मही बोरा।
अति आतुर जमकातर तोरा।।"
शब्दार्थ:
बाग उजारि = बाग (अशोक वाटिका) को उजाड़ दिया
सिंधु मही बोरा = समुद्र में डुबा दिया
अति आतुर = अत्यधिक व्याकुल, तत्पर
जमकातर तोरा = यमराज के दूतों (मृत्यु) का घमंड तोड़ दिया
भावार्थ:
हनुमान जी ने अशोक वाटिका को तहस-नहस कर दिया और उसे समुद्र में डुबो दिया । वे इतने शक्तिशाली हैं कि उन्होंने यमराज के भय को भी मिटा दिया और मृत्यु के घमंड को चूर-चूर कर दिया।
विस्तृत विवेचन:
1. हनुमान जी की शक्ति और वीरता:
इस श्लोक में हनुमान जी की विनाशकारी रूप का वर्णन है, जो उन्होंने लंका दहन के समय दिखाया।
अशोक वाटिका को उन्होंने राक्षसों से युद्ध कर नष्ट कर दिया और उसे समुद्र में डुबो दिया।
2. अधर्म पर धर्म की विजय:
"सिंधु मही बोरा" का अर्थ है — सम्पूर्ण अशोक वाटिका को उजार कर उसे समुद्र में डुबो दिया।
यह अधर्म और अत्याचार पर धर्म के विजय की प्रतीक घटना है।
3. मृत्यु पर विजय:
"जमकातर तोरा" — यह अत्यंत गहरा प्रतीक है। हनुमान जी अजर-अमर हैं, उन्हें मृत्यु का भय नहीं।
उनकी शक्ति इतनी महान है कि यमराज के दूत भी उनसे भयभीत रहते हैं।
इसका भावार्थ है — जो हनुमान जी की शरण में रहता है, वह मृत्यु से भी नहीं डरता।
4. भक्तों के लिए संदेश:
यह श्लोक हमें विश्वास दिलाता है कि हनुमान जी की शरण में आने से सारे संकट, मृत्यु का भय और अधर्म की ताकतें समाप्त हो जाती हैं।
निष्कर्ष:
"बाग उजारि सिंधु मही बोरा..." श्लोक हनुमान जी की उस पराक्रमी और उग्र रूप का चित्रण करता है, जो वे अधर्म के विनाश के लिए अपनाते हैं।
यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि जब अन्याय बढ़ता है, तो हनुमान जैसा साहस और तेज ही समाधान है। और जब हम उनकी शरण में होते हैं, तो मृत्यु का भय भी खत्म हो जाता है।
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