बजरंग बाण (श्लोक31)

 बजरंग बाण श्लोक 31 का भावार्थ सहित विस्तृत विवेचन:

श्लोक:

*ऊं हं हं हांक देत कपि चंचल।

ऊं सं सं सहमि पराने खल दल।।

भावार्थ:

इस मंत्र में हनुमान जी की प्रचंड हुंकार और उसके प्रभाव का वर्णन है। जब हनुमान जी हुंकार भरते हैं, तो दुष्ट और शत्रु भयभीत होकर काँपने लगते हैं और भाग खड़े होते हैं। यह श्लोक संकटमोचन हनुमान जी की अद्भुत शक्ति का प्रमाण है।

विवेचना:

1. हनुमान जी की हुंकार शक्ति:

"हं हं हांक देत" का अर्थ है कि हनुमान जी अपनी हुंकार से दुष्टों को चेतावनी देते हैं। उनकी हुंकार इतनी प्रचंड होती है कि किसी भी शत्रु की हिम्मत टूट जाती है।

"सं सं सहमि" से तात्पर्य है कि शत्रु और नकारात्मक शक्तियाँ भयभीत होकर काँपने लगती हैं।

2. चंचल और प्रचंड रूप:

हनुमान जी का "कपि चंचल" स्वरूप उनकी तीव्र गति और फुर्ती का प्रतीक है। वे न केवल तेजी से कार्य करते हैं बल्कि उनके भीतर अद्भुत बल और साहस भी है। इस श्लोक में उनकी गति और शक्ति का सुंदर समन्वय दिखता है।

3. शत्रु दल का नाश:

"खल दल" यानी दुष्टों का समूह। यह मंत्र बताता है कि हनुमान जी का स्मरण मात्र से ही सभी शत्रु भयभीत होकर भाग जाते हैं और साधक की विजय सुनिश्चित होती है।

निष्कर्ष:

यह मंत्र साहस और विजय का प्रतीक है। जीवन में जब भी आप खुद को कमजोर महसूस करें या शत्रुबल हावी हो, इस मंत्र का जप आपको नई शक्ति और आत्मविश्वास देगा। यह हनुमान जी की हुंकार शक्ति का अद्भुत चित्रण है।

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